नई दिल्ली (Alternative Medical Courses). भारत में मेडिकल शिक्षा को MBBS या BDS से जोड़ा जाता है. बायोलॉजी स्ट्रीम से 12वीं करने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं. हालांकि, सीमित सीटों की वजह से कई स्टूडेंट्स का सपना अधूरा रह जाता है. हर साल लाखों स्टूडेंट्स एमबीबीएस/बीडीएस की प्रवेश परीक्षाएं देते हैं, लेकिन सभी सफल नहीं हो पाते हैं. इसीलिए अब मेडिकल क्षेत्र के वैकल्पिक कोर्स भी काफी प्रचलित हो रहे हैं.
ये वैकल्पिक
मेडिकल और हेल्थकेयर कोर्स न सिर्फ भारत में, बल्कि विदेशों में भी डिमांड में हैं. हेल्थकेयर सिस्टम में बढ़ते प्रेशर के कारण नर्सिंग, पैरामेडिकल, फिजियोथेरेपी जैसी फील्ड्स में एडमिशन लेने वालों की संख्या बढ़ रही है. साथ ही आयुष (BAMS, BHMS, BUMS आदि) की मांग भी बढ़ रही है क्योंकि लोग प्राकृतिक उपचारों की तरफ लौट रहे हैं. इस तरह के मेडिकल कोर्स रिसर्च में काम करने और हॉस्पिटल या वेलनेस सेंटर शुरू करने जैसे कई अवसर प्रदान करते हैं.
डिमांड में हैं वैकल्पिक मेडिकल कोर्स
अगर आपको MBBS या BDS में एडमिशन नहीं मिल पाया है तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. इसका यह मतलब नहीं है कि आप मेडिकल की दुनिया से बाहर हो गए हैं. वैकल्पिक चिकित्सा विकल्प (Alternative Medical Courses) की फीस एमबीबीएस और बीडीएस की तुलना में कम होती है और कॉम्पिटीशन लेवल भी कम होने की वजह से आसानी से एडमिशन मिल जाता है. हॉस्टिपल और वेलनेस सेंटर में नर्स, पैरामेडिक्स, फिजियोथेरेपिस्ट, हर तरह के टेक्नीशियन और थेरैपिस्ट की मांग हमेशा रहती है.
वैकल्पिक मेडिकल कोर्सेस में एडमिशन क्यों लें?
- एमबीबीएस और बीडीएस BDS की सीटों पर हाई कटऑफ और कॉम्पिटीशन का लेवल ज्यादा होता है. वैकल्पिक मेडिकल कोर्स कम अवधि में पूरे होते हैं और इनकी फीस भी कम होती है.
- हॉस्पिटल, वेलनेस सेंटर्स, रिसर्च और वैकल्पिक चिकित्सा क्षेत्रों में करियर के अच्छे अवसर होते हैं.
डिमांड में हैं ये मेडिकल कोर्स
1. आयुष कोर्सेस (Ayush Courses)
इसमें आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और नैचुरोपैथी/योग विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं. ये परंपरागत और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां हैं. दुनियाभर में इनका मान बढ़ रहा है. इसकी पढ़ाई करने पर BAMS, BHMS, BUMS आदि डिग्रियां मिलती हैं. हॉस्पिटल और वेलनेस सेंटर्स में प्रैक्टिस के अवसर मौजूद हैं.
2. फिजियोथेरेपी (BPT)
फिजिकल रिवाइवल, सर्जरी के बाद की रिकवरी, खेलों से चोट आदि मामलों में फिजियोथेरेपिस्ट की जरूरत बढ़ रही है. फिजियोथेरेपी कोर्स उन मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए अच्छा विकल्प है, जो फिजियोलॉजी और व्यायाम विज्ञान में रुचि रखते हैं.
3. फार्मेसी (B.Pharma)
बीफार्मा कोर्स करके दवाओं के निर्माण, शोध, क्लीनिक फार्मेसी आदि क्षेत्रों में काम मिल सकता है. इसमें फार्मा इंडस्ट्री में नौकरी के साथ-साथ अपनी फार्मेसी खोलने का अवसर भी है. ड्रग डेवलपमेंट और क्लीनिकल ट्रायल्स वाले क्षेत्रों में भी स्कोप ज्यादा है.
4. नर्सिंग और पैरामेडिकल कोर्सेस
नर्सिंग हेल्थसर्विस सेक्टर की रीढ़ है. हॉस्पिटल, क्लीनिक, इमर्जेंसी हेल्थ डिपार्टमेंट में इन प्रोफेशनल्स की मांग बहुत ज्यादा है. लैब टेक्नीशियन, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया टेक्नोलॉजी जैसे पैरामेडिकल फील्ड्स की डिमांड भी बहुत ज्यादा रहती है.
5. ऑक्यूपेशनल थेरेपी एंड स्पीच थेरेपी
बोलने में असमर्थ बच्चों, विकलांगों, विकास संबंधी अक्षमताओं वाले व्यक्तियों के लिए ये कोर्सेस महत्वपूर्ण हैं. स्कूलों, रिहैबिलिटेशन सेंटर्स और निजी प्रैक्टिस में काम के अवसर मिलते हैं.
6. फॉरेंसिक साइंस और मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी
अगर क्राइम इनवेस्टिगेशन, कानूनी प्रक्रियाओं और डीएनए परीक्षण आदि में रुचि है तो फॉरेंसिक साइंस बेस्ट है. मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी में रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में करियर विकल्प बेमिसाल हैं- नई दवाएं, वैक्सीन, जैव तकनीक में काम करना.