Friday, April 17, 2026
Homeराज्यउत्तरप्रदेश‘क्लाइंट के हित मे वकील का पीआइएल करना कदाचार’: फिरोजाबाद के...

‘क्लाइंट के हित मे वकील का पीआइएल करना कदाचार’: फिरोजाबाद के अधिवक्ता को चेतावनी के साथ जनहित याचिका खारिज – Prayagraj (Allahabad) News




इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि कोई अधिवक्ता अपने मुवक्किल का केस आगे बढ़ाने के लिए खुद ही याची बन जनहित याचिका दायर नहीं कर सकता।
यह पेशेवर कदाचार है। कोर्ट के अनुसार जनहित याचिका का उद्देश्य गरीब, वंचित या जनहित के लिए है न कि निजी हित या मुवक्किल का केस मजबूत करने के लिए। बार काउंसिल में शिकायत हो सकती है मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने फिरोजाबाद निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार शर्मा की जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा, अधिवक्ता को कोर्ट का अधिकारी माना जाता है। यदि वह मुवक्किल के फायदे के लिए खुद याची बनता है तो एडवोकेट्स एक्ट के तहत पेशेवर कदाचार है। उसके खिलाफ बार कौंसिल में शिकायत भी हो सकती है। वकील का खुद पार्टी बनना सही नहीं खंडपीठ ने कहा, अगर वकील को जनहित का मुद्दा लगता है तो वो किसी असली प्रभावित व्यक्ति से ऐसी जनहित याचिका दाखिल करवा सकता है, खुद पार्टी नहीं बन सकता।
इस क्रम में अशोक कुमार पांडेय बनाम पश्चिम बंगाल तथा उत्तराखंड राज्य बनाम बलवंत सिंह चौफाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया जिसमें पीआइएल के दुरुपयोग पर रोक लगाई गई है। मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि खुद को कुछ इंडस्ट्रीज का लीगल एडवाइजर बताते हुए याची ने पेट्रोलियम मंत्रालय की गाइडलाइंस के आधार पर नेचुरल गैस कनेक्शन दिए जाने की मांग की थी।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments