पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ के ‘ऑरा इंडिया टूर’ के दिल्ली कॉन्सर्ट की तारीख बदल दी गई है। पहले यह शो 1 नवंबर को होना था, लेकिन पंजाबी प्रमोशन काउंसिल की अपील के बाद अब इसे 30 अक्टूबर को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू (JLN) स्टेडियम में आयोजित किया
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तारीख बदलने की अपील 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ी संवेदनशीलता को देखते हुए की गई। पंजाबी प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने दिलजीत और उनकी टीम को पत्र लिखकर कॉन्सर्ट की तारीख बदलने की अपील की थी।
पंजाबी प्रमोशन काउंसिल ने लिखा था पत्र
काउंसिल ने अपने पत्र में कहा था कि 1 नवंबर का दिन सिख समुदाय के कई परिवारों के लिए दर्दनाक यादों से जुड़ा है। 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख-विरोधी दंगे भड़के थे। इस इन दंगों की यादें आज भी पीड़ित परिवारों और सिख समुदाय के लिए संवेदनशील हैं।
काउंसिल ने दिलजीत की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पंजाबी संगीत और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है। साथ ही स्पष्ट किया कि इस अपील का मकसद उनके संगीत, उपलब्धियों या कॉन्सर्ट का विरोध करना नहीं है। काउंसिल ने उनसे केवल यह विचार करने का अनुरोध किया था कि 1 नवंबर को कार्यक्रम आयोजित होने से पीड़ित परिवारों और सिख समुदाय की भावनाओं पर क्या असर पड़ सकता है।
1984 के सिख विरोधी दंगों के बारे में जानिए…
- दंगों का मुख्य कारण ऑपरेशन ब्लू स्टार: जून 1984 में अमृतसर के गोल्डन टेंपल में छिपे अलगाववादियों को निकालने के लिए सेना ने ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ चलाया था, जिससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं बहुत आहत हुई थीं।
- तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की हत्या: इसी सैन्य कार्रवाई के गुस्से में 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही दो सिख सिक्योरिटी गार्डों ने गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके तुरंत बाद यह हिंसा भड़क उठी।
- भीषण हिंसा और भारी नुकसान: 31 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच मुख्य रूप से दिल्ली और उत्तर भारत में हिंसक भीड़ ने सिखों को निशाना बनाया; सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 3,350 सिख मारे गए, जबकि गैर-सरकारी अनुमानों के मुताबिक यह संख्या 8,000 से अधिक थी।
- प्रशासनिक मिलीभगत और सुनियोजित साजिश: मानवाधिकार संगठनों और गवाहों के अनुसार, यह दंगे स्वतःस्फूर्त नहीं बल्कि सुनियोजित थे, जिसमें कुछ नेताओं द्वारा भीड़ को उकसाने और पुलिस व प्रशासन के मूकदर्शक बने रहने के गंभीर आरोप लगे।
- जांच और अदालती फैसले: पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए नानावती आयोग सहित कई कमेटियां बनीं, जिसके बाद लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2018 में कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद हुई और अन्य आरोपियों पर भी मुकदमे चलते रहे।
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