सवाई माधोपुर जिले के चकेरी गांव में लंपी स्किन डिजीज का पहला मामला सामने आने के बाद पशुपालन विभाग अलर्ट हो गया है। बीमारी की रोकथाम के लिए विभाग ने कार्य योजना तैयार की है। संदिग्ध पशुओं की सूचना मिलने पर सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं और सैंपल लेने के साथ ही पशुओं का उपचार भी शुरू किया जा रहा है। जिला और तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम लंपी स्किन डिजीज के संभावित प्रकोप को देखते हुए पशुपालन विभाग ने जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इसके साथ ही तहसील स्तर पर भी नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं और नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। विभाग के अनुसार लंपी से ग्रसित गाय की सूचना मिलने पर लैब से कर्मचारियों को मौके पर भेजा जा रहा है। टीम सैंपल लेकर उन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज रही है। पशुपालकों से भी पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना देने की अपील की गई है। संक्रमित पशुओं के लिए क्वारंटाइन सेंटर संक्रमित या संदिग्ध पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने के लिए क्वारंटाइन सेंटर भी बनाए गए हैं। इसका उद्देश्य बीमारी के संक्रमण को दूसरे पशुओं में फैलने से रोकना है। क्या है लंपी स्किन डिजीज लंपी स्किन डिजीज में पशु के शरीर पर गोल-गोल गांठें या उभरे हुए घाव दिखाई देना प्रमुख लक्षण है। इसके साथ तेज बुखार, आंखों और नाक से पानी या स्राव आना, भूख कम होना, कमजोरी, शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशु को तुरंत दूसरे पशुओं से अलग कर देना चाहिए और वेटरनरी डॉक्टर को सूचना देनी चाहिए। इससे संक्रमित पशु के संपर्क में आने वाले दूसरे पशुओं में बीमारी फैलने का खतरा कम किया जा सकता है।
Source link

