अहमदाबाद की वासणा पुलिस ने 14.5 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपी गुजरात के नीलेश धीरूभाई पटेल को MP के बैतूल से गिरफ्तार किया है। धीरूभाई पटेल हुलिया बदलकर बैतूल में छिपा था और 7 साल से पुलिस को चकमा दे रहा था। पुलिस के मुताबिक, उसने 65 बैंक खाते और 19-20 शेल कंपनियों का नेटवर्क खड़ा किया, जिसे चाइन के हांगकांग से ऑपरेट किया जा रहा था। वासणा पुलिस के मुताबिक, नीलेश लग्जरी कार, iPhone और टैबलेट से रुतबा दिखाता था। वह खुद को शेयर मार्केट एडवाइजर बताता था। अहमदाबाद की वासणा पुलिस ने ‘ऑपरेशन हॉक आई’ के तहत 10 महीने की निगरानी के बाद गुरुवार को गिरफ्तार किया। उसके सहयोगी दीपक आहूजा उर्फ दीपू टैंक को भी पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक, नीलेश ने फर्जी प्रॉपर्टी लोन, शेल कंपनियों और निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की। दोनों आरोपियों से कार, लैपटॉप और मोबाइल समेत करीब 35 लाख रुपए की संपत्ति बरामद की गई है। आरोपियों से जुड़े 65 बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं, जिनमें करीब 20 लाख रुपए जमा हैं। 10 महीने की निगरानी के बाद गिरफ्तारी अहमदाबाद जोन-7 के डीसीपी शिवम शर्मा के मुताबिक, पुलिस करीब 10 महीने से तकनीकी और ह्यूमन सर्विलांस के जरिए नीलेश की तलाश कर रही थी। मध्यप्रदेश पुलिस की मदद से उसे बैतूल से पकड़ा गया। अहमदाबाद पुलिस ने रविवार को मामले का खुलासा किया। मुंबई में शेल कंपनियां बनाने का दावा पुलिस के मुताबिक, अहमदाबाद से फरार होने के बाद नीलेश मुंबई में रहने लगा था। पूछताछ में उसने बताया कि वहां उसने ‘टोशन ग्रुप’ के नाम से 19 से 20 शेल कंपनियां खड़ी कीं। इनमें से ‘टोशन इंटरनेशनल’ का रजिस्ट्रेशन हांगकांग में भी कराया गया था। पुलिस का दावा है कि चाइन के हांगकांग से फ्रॉड करने के बाद नीलेश पिछले दो साल से बैतूल में रह रहा था। यहां उसने क्लीनशेव होकर अपना हुलिया बदल लिया था, ताकि पहचान छिपी रहे। सेमीकंडक्टर प्लांट और क्रिप्टो के नाम पर निवेश पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने सेमीकंडक्टर और क्रिप्टोकरेंसी में लोगों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए निवेश जुटाने की योजना बनाई। उसने ‘टोशन लिबरल साइंटिफिक’ नाम की कंपनी बनाई और प्रस्तावित सेमीकंडक्टर प्लांट का प्रचार किया। इसके साथ ही ‘सेमी कॉइन’ नाम की क्रिप्टोकरेंसी के जरिए निवेश जुटाने की तैयारी की। उसने उत्तर प्रदेश में जमीन भी चिन्हित की थी। पुलिस का दावा है कि उसने कथित तौर पर निवेशकों से करीब 5 करोड़ रुपए जुटाए थे। मालिक को पता चले बिना 90 लाख का लोन वासणा थाने में दर्ज एक मामले में आरोप है कि नीलेश ने ‘प्रियंका फैशन्स’ नाम की फर्म के जरिए एक संपत्ति के आधार पर 90 लाख रुपए का लोन हासिल किया। संपत्ति के वास्तविक मालिक को इसकी जानकारी तक नहीं थी। नीलेश के खिलाफ क्राइम ब्रांच-3, चिलोड़ा, नरोला और निकोल थानों में भी मामले दर्ज हैं। बैंक अधिकारियों और वैल्यूअर्स की भूमिका की जांच जांच में सामने आया कि आरोपी कुछ बैंक अधिकारियों और प्रॉपर्टी वैल्यूअर्स के संपर्क में था। ये लोग ऐसी संपत्तियों की पहचान करते थे, जिनके मालिकाना हक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी या जो फर्जी थीं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंकों से बड़े लोन हासिल करते थे। शक से बचने के लिए शुरुआत में दो-तीन किस्तें चुकाई जाती थीं। इसके बाद किस्तें देना बंद कर आरोपी फरार हो जाते थे। सिंडिकेट से जुड़े एक बैंक मैनेजर को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। बैंक मैनेजर्स और प्रॉपर्टी वैल्यूअर्स की भूमिका की भी जांच वासणा पुलिस अब अन्य बैंक मैनेजर्स और प्रॉपर्टी वैल्यूअर्स की भूमिका की भी जांच कर रही है। पूछताछ में आरोपी ने फरारी के दौरान अपने ठिकानों और सहयोगियों से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि सात साल की फरारी के दौरान वह कहां-कहां रहा और किन लोगों की मदद से छिपा रहा।
………………………………………. यह खबर भी पढ़ें… क्रिप्टो में मोटे मुनाफे का झांसा…12 लाख की ठगी भोपाल के बागसेवनिया इलाके में साइबर ठगों ने पहले 160 रुपए का बोनस देकर एक युवक का भरोसा जीता और फिर क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर करीब 12 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने युवक को वॉट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर अलग-अलग टास्क दिए। शुरुआत में टास्क पूरा करने पर 160, 100 और 1500 रुपए तक बोनस दिया। इसके बाद बड़े मुनाफे का लालच देकर अलग-अलग बैंक खातों और UPI ID में रुपए ट्रांसफर कराते रहे।पूरी खबर पढ़ें
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