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दिग्गज हीरोइन ने 1966 में ‘दस लाख’ से करियर शुरू किया था. उन्होंने ‘फर्ज’, ‘राज’ और ‘हसीना मान जाएगी’ जैसी फिल्मों से अपना टैलेंट साबित की. उन्होंने पर्दे पर मॉडर्न और ट्रेडिशनल दोनों तरह के किरदारों को बखूबी निभाया. उन्होंने 1971 में हीरो से शादी के बाद अपने सफल करियर को अलविदा कह दिया और बेटियों को स्टार बना दिया.
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की बात हो तो एक हीरोइन का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. उन्होंने अपने पूरे करियर में भले ही कम फिल्में की हों, लेकिन उनके निभाए हर किरदार ने दर्शकों के दिल पर गहरी छाप छोड़ी है. एक्ट्रेस की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि उन्होंने खुद को कभी किसी एक खास इमेज या टाइपकास्ट किरदारों में नहीं बांधा. (फोटो साभार: IMDb)

हम करिश्मा कपूर और करीना कपूर की मां बबीता की बात कर रहे हैं, जिनका जन्म 20 अप्रैल 1947 को कराची में हुआ था. उनके पिता हरि शिवदासानी स्वयं फिल्म जगत का हिस्सा थे, जिससे अभिनय की समझ उन्हें विरासत में मिली थी. उन्होंने 1966 में फिल्म ‘दस लाख’ से बॉलीवुड में कदम रखा. अपनी पहली ही फिल्म में उन्होंने ‘रीता’ नाम की एक इमोशनल लड़की के किरदार को इतनी सादगी से निभाया कि पूरी इंडस्ट्री की नजरें उन पर टिक गईं. (फोटो साभार: Instagram@babita.shivdasani.kapoor)

बबीता को शुरुआती सफलता के बाद सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ फिल्म ‘राज’ में काम करने का मौका मिला. इस सस्पेंस थ्रिलर फिल्म में बबीता ने एक मिस्ट्री किरदार निभाया था. हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी कामयाबी नहीं पा सकी, लेकिन लोगों ने बबीता की एक्टिंग स्किल और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस की जमकर तारीफ की, जिससे उनके लिए बड़े बैनरों के रास्ते खुल गए. (फोटो साभार: Instagram@babita.shivdasani.kapoor)
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बबीता के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट फिल्म ‘फर्ज’ रही. इस फिल्म में उनकी रोमांटिक इमेज और स्टाइल को युवाओं ने खूब पसंद किया. ‘फर्ज’ की जबरदस्त सफलता ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया. इसके बाद, उन्होंने ‘हसीना मान जाएगी’ जैसी फिल्मों में अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग दिखाई, तो वहीं ‘किस्मत’ जैसी फिल्मों में संजीदा अभिनय करती नजर आईं. (फोटो साभार: Instagram@babita.shivdasani.kapoor) (फोटो साभार: IMDb)

बबीता ने पर्दे पर हमेशा नए एक्सपेरिमेंट किए. उन्होंने साल 1969 की फिल्म ‘एक श्रीमान एक श्रीमती’ में एक मॉडर्न और आत्मविश्वास से भरी लड़की का रोल निभाया, जो उस जमाने की ट्रेडिशनल हीरोइनों से काफी अलग था. उन्होंने ‘तुमसे अच्छा कौन है’ और ‘अनजाना’ जैसी फिल्मों के जरिये यह साबित किया कि वह फैमिली ड्रामा और रोमांस, दोनों को पूरी सहजता के साथ पर्दे पर उतार सकती हैं. (फोटो साभार: Instagram@babita.shivdasani.kapoor) (फोटो साभार: IMDb)

साल 1971 बबीता के पेशेवर और निजी जीवन दोनों के लिए बेहद अहम रहा. उन्होंने इसी साल रणधीर कपूर के साथ फिल्म ‘कल आज और कल’ में काम किया. फिल्म की शूटिंग के दौरान ही दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उनकी प्रेम कहानी शुरू हुई. इस फिल्म में भी उनके ‘मॉडर्न लुक’ और अभिनय की काफी चर्चा हुई थी, जिसने उन्हें फैशन आइकन के रूप में मशहूर बना दिया. (फोटो साभार: Instagram@babita.shivdasani.kapoor)

रणधीर कपूर से शादी के बाद बबीता ने एक बड़ा फैसला लिया और बॉलीवुड की चकाचौंध को अलविदा कह दिया. उस समय कपूर खानदान की परंपराओं के चलते उन्होंने अपने सफल करियर को छोड़कर परिवार और घर को महत्व दिया. हालांकि फिल्मों से दूर होने के बाद भी उनका असर कम नहीं हुआ और वह एक मजबूत महिला के रूप में सामने आईं. (फोटो साभार: Instagram@babita.shivdasani.kapoor)

बबीता ने अपना पूरा जीवन अपनी बेटियों, करिश्मा कपूर और करीना कपूर खान को संवारने में लगा दिया. उन्होंने न केवल उनकी बेहतरीन परवरिश की, बल्कि उन्हें फिल्म जगत की सफल हीरोइनें बनाने में गाइड की भूमिका निभाई. आज भले ही बबीता पर्दे पर सक्रिय न हों, लेकिन उनकी फिल्में और उनकी बेटियों की सफलता उनकी शानदार शख्सियत की गवाही देती हैं. (फोटो साभार: Instagram@babita.shivdasani.kapoor)

