सीकर में 39 साल बाद एक ही मंच पर 7 लोगों ने दीक्षा लेकर सन्यास अपना लिया। सीकर में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याण दिवस पर दीक्षा दी गई। यह महामहोत्सव आचार्य वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में करवाया गया। इससे पहले मार्च 1987 में आचार्य धर्मसागर ने सीकर में क्षुल्लिका अनंतमति को दीक्षा दी थी। 1961 में आचार्य शिव सागर ने सीकर में 8 जनों को दीक्षा दी थी। सुभाष पहाड़िया ने बताया- इससे पहले मंगलवार शाम को सातों दीक्षार्थियों की शोभायात्रा निकाली गई थी। इसमें संगीत व जयकारों के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए। दीक्षा महोत्सव के पहले दिन दीक्षार्थियों ने आचार्य व संघ के साधुओं को खाना खिलाया। इसके बाद 6 दीक्षार्थियों ने बर्तनों की जगह हथेलियों में आहार कर त्याग का संदेश दिया। इस अवसर पर मंत्री झाबर सिंह खर्रा, विधायक राजेंद्र पारीक, भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज बाटड़, पूर्व सांसद सुमेधानंद सरस्वती, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. कमल सिखवाल सहित अन्य समाजसेवी उपस्थित थे। इन्होंने दीक्षा ली पारसनाथ पर्वत का प्रतीकात्मक स्वरूप दिखा जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव स्थल पर इस बार झारखंड स्थित सम्मेद शिखरजी (स्वर्णभद्र टोंक) यानी पारसनाथ पर्वत का प्रतीकात्मक स्वरूप श्रद्धालुओं को देखने को मिला है। भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक से जुड़ा यह प्रतीकात्मक शिखर प्रमुख आकर्षण रहा। इसे थर्माकोल से तैयार किया गया है। पवन मोदी ने बताया- जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन पार्श्वनाथ ने सम्मेद शिखरजी से कर्मों का क्षय कर मोक्ष प्राप्त किया था। अनुभव जैन ने बताया कि प्रतीकात्मक स्वरूप तैयार करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को इस पवित्र तीर्थ की अनुभूति कराना है। अंक गणित का अनूठा संयोग दीक्षा दिवस का अंक गणित भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के अंक 23 में 2 अरिहंत-सिद्ध बनने की भावना और 3 रत्नत्रय (सम्यक दर्शन, ज्ञान, चारित्र) का प्रतीक है। सप्तमी तिथि पर 7 दीक्षार्थियों ने संयम पथ अपनाया।
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