जयपुर13 मिनट पहले
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पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध और विविध संस्कृति अब जयपुर में एक साथ देखने को मिलेगी। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के सहयोग से ‘ऑक्टेव 2026’ का आयोजन 1 से 4 अक्टूबर तक किया जाएगा। चार दिवसीय आयोजन में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की लोक एवं शास्त्रीय कलाओं, संगीत, पारंपरिक परिधानों, शिल्प और खानपान की झलक देखने को मिलेगी।
आयोजन का उद्घाटन 1 अक्टूबर को शाम 7 बजे होगा। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समारोह की अध्यक्षता करेंगे। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक निहाल चंद गोयल भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।

मीडिया को संबोधित करते पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक डॉ. अश्विन दलवी और आरआईसी के निदेशक निहालचंद गोयल।
राजस्थान में तीसरी बार होगा ऑक्टेव
‘ऑक्टेव’ केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत की कला और सांस्कृतिक विरासत को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना है। राजस्थान में इसका आयोजन तीसरी बार हो रहा है। इससे पहले 2012 में जोधपुर और 2016 में अजमेर में ऑक्टेव का आयोजन किया जा चुका है। करीब 10 साल बाद यह आयोजन फिर राजस्थान में लौट रहा है और इस बार जयपुर को इसकी मेजबानी मिली है।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि इस बार आयोजन में आठों राज्यों की संस्कृति को अलग-अलग माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में 250 से अधिक लोक कलाकार हिस्सा लेंगे, जिन्हें कोरियोग्राफर तरुण प्रधान तैयार करेंगे। आयोजन का आकर्षक एंबियंस कोलकाता के अनूप गिरी ने डिजाइन किया है।
बिहू से चेराव और नागा युद्ध नृत्य
चार दिनों तक राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर का मंच पूर्वोत्तर के लोक जीवन, प्रकृति, कृषि, पर्व, वीरता और लोक आस्थाओं से जुड़ी नृत्य परंपराओं से सजेगा। असम के बारदोई सिकला और बिहू, नागालैंड के नागा युद्ध नृत्य, मेघालय के वांगला, मिजोरम के प्रसिद्ध चेराव यानी बांस नृत्य और सरलामकाई समारोह प्रमुख आकर्षण होंगे।
मणिपुर की संस्कृति भी कई पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सामने आएगी। इनमें ढोल वादन और नृत्य का संगम पुंग चोलोम, पारंपरिक युद्धकला थांग-ता, मीतेई समुदाय की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा लाई हराओबा और चेरोल जागोई की प्रस्तुतियां शामिल हैं।
मणिपुरी रास और सत्रिया की शास्त्रीय प्रस्तुतियां
आयोजन में पूर्वोत्तर की शास्त्रीय नृत्य परंपराओं को भी विशेष स्थान दिया गया है। 2 और 3 अक्टूबर को मणिपुरी रास की प्रस्तुति होगी। राधा-कृष्ण के प्रेम और गोपियों की भक्ति पर आधारित इस नृत्य शैली में भाव, लय और शास्त्रीय गतियों का समन्वय देखने को मिलेगा।
वहीं 3 और 4 अक्टूबर को असम की शास्त्रीय नृत्य परंपरा सत्रिया की प्रस्तुति होगी। वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव द्वारा प्रवर्तित सत्रिया में भक्ति और नाटकीय अभिव्यक्ति का अनूठा मेल दिखाई देता है।
पूर्वोत्तर की विविध लोक परंपराओं को मंच पर लाने के क्रम में सिक्किम का सिंघी छम यानी स्नो लायन नृत्य और तमांग सेलो, त्रिपुरा का होजागिरी और ममिता तथा अरुणाचल प्रदेश का जुजु-झा-झा और ताई खामती नृत्य भी प्रस्तुत किया जाएगा।
इन प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों को पूर्वोत्तर के अलग-अलग समुदायों की जीवनशैली, परंपराओं और लोक मान्यताओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
पारंपरिक परिधानों में दिखेगी आठ राज्यों की पहचान
1 और 2 अक्टूबर को एथनिक कॉस्ट्यूम शो आयोजित किया जाएगा। इसमें आठों राज्यों के पारंपरिक परिधान और आभूषण प्रदर्शित किए जाएंगे। परिधानों के माध्यम से वहां के अलग-अलग समुदायों की पहचान, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।
वहीं 3 अक्टूबर को नागालैंड का समूह गायन होगा, जिसमें वहां की सामूहिक गायन परंपरा के साथ लोक और समकालीन संगीत के स्वर सुनाई देंगे।
‘ऑक्टेव’ के मुख्य आयोजन से पहले 28 सितंबर से सात दिवसीय नॉर्थ-ईस्ट पेंटर्स कैंप भी शुरू होगा। इसका आयोजन केंद्रीय ललित कला अकादमी, नई दिल्ली के सहयोग से किया जा रहा है। शिविर में पूर्वोत्तर के 10 नामचीन कलाकार हिस्सा लेकर अपनी कलाकृतियां तैयार करेंगे।
शिविर में त्रिपुरा से अभिजीत भट्टाचार्जी और निशान कुरी, असम से कौशिक कुंडू और प्रियम तालुकदार, मेघालय से बनियार्जिंगुमुत जीएल मावफलंग और ए इमोजेन फ्रांसेस्का वाहलांग, अरुणाचल प्रदेश से मारबा कामकी और एजुम रीबा, मिजोरम से लालजाव्मकिया तथा मणिपुर से राहुलदेव सीरम शामिल होंगे।
आयोजन के दौरान 1 और 2 अक्टूबर को दो दिवसीय सेमिनार भी होगा। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से 12 शिक्षाविद और विषय विशेषज्ञ पूर्वोत्तर की कला, संस्कृति, सामाजिक जीवन, पारंपरिक कलाओं और बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश पर चर्चा करेंगे।
नागालैंड के रॉक बैंड के साथ होगा समापन
4 अक्टूबर को ऑक्टेव का समापन होगा। समापन समारोह में सत्रिया और विभिन्न लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों के साथ नागालैंड के ‘डिवाइन कनेक्शन’ रॉक बैंड की प्रस्तुति होगी। इस तरह पारंपरिक लोक एवं शास्त्रीय कलाओं के साथ पूर्वोत्तर की आधुनिक संगीत अभिव्यक्ति भी समारोह का हिस्सा बनेगी।


