ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में शनिवार रात करीब 1:30 बजे धान से भरा ट्रक दर्शन की कतार में खड़े श्रद्धालुओं पर चढ़ गया। 15 लोगों की मौत हुई और 40 से ज्यादा घायल हैं। अब मंदिर समिति हादसे में आतंकी साजिश की आशंका जता रही है। पुलिस ब्रेक, शराब और गूगल मैप की बात कर रही है। परिजन पूछ रहे हैं कि ट्रक वहां पहुंचा कैसे। कौन-सी थ्योरी कितनी पुख्ता है और जवाबदेही किसकी बनती है; समझते हैं आज के मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में… सवाल 1: हादसे को लेकर अब तक किस-किस तरह की थ्योरी सामने आई हैं? जवाब- अब तक दो वजहें सामने आई हैं- ब्रेक फेल होना और ड्राइवरों की गलती। तीसरी थ्योरी साजिश की है। थ्योरी 1: ब्रेक ने जवाब दे दिया थ्योरी 2: गूगल मैप, शॉर्टकट, शराब, टोल टैक्स तीसरी थ्योरी साजिश की है, जो मंदिर समिति ने उठाई है। सवाल 2: हादसा है या जानबूझकर किया गया हमला- फर्क कैसे पता चलेगा? जवाब- फर्क नीयत का है, और नीयत सबूतों की कड़ियों से तय होती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक जांच में ये कड़ियां देखी जाएंगी… ट्रक: ब्रेक, टायर और गियर की जांच से पता चलेगा कि वाहन में खराबी थी या नहीं। माल का असली वजन भी यहीं से निकलेगा। ड्राइवर: ब्लड रिपोर्ट से शराब का स्तर पता चलेगा। शराब का असर समय के साथ घटता है, इसलिए यह भी देखा जाएगा कि सैंपल हादसे के कितनी देर बाद लिया गया। फोन और रूट: गूगल मैप का रिकॉर्ड और फोन की लोकेशन बताएगी कि ड्राइवर किस रास्ते पर और क्यों गए। माल के कागजों से पता चलेगा कि धान कहां से लदा और कहां जाना था। रास्ते के रिकॉर्ड: चेकिंग पॉइंट के CCTV, तैनात पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों के बयान। कानून में क्या फर्क है? लापरवाही से मौत: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत लापरवाही से मौत के मामलों पर कार्रवाई हो सकती है। कौन-सी उपधारा लागू होगी, यह मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा। गैर-इरादतन हत्या: धारा 105 के तहत अपराध के लिए कानून में बताई गई मंशा या जानकारी जैसे तत्वों को साबित करना जरूरी है। केवल यह जानना कि किसी काम से दुर्घटना हो सकती है, अपने आप में धारा 105 लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है। आतंकी कृत्य: इसके लिए लागू कानून के तहत जरूरी कानूनी तत्वों और सबूतों को साबित करना होगा। किसी योजना, रेकी, बातचीत या संपर्क के रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है, लेकिन इनमें से किसी एक बात का मिलना अपने आप आतंकवादी हमला साबित नहीं करता। सवाल 3: मंदिर समिति को आतंकी हमले का शक क्यों? जवाब- अब तक कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है। समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर ने धार्मिक आयोजन को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की आशंका जताई है और SIT जांच की मांग की है। लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ संभावना कहा है और कोई सबूत नहीं दिया है। पुलिस या प्रशासन ने साजिश की बात नहीं कही है। जो बातें शक बढ़ाती हैं… जो बातें दूसरी तरफ इशारा करती हैं… सवाल 4: ऐसे मेले में सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होती है और चूक कहां हुई? जवाब- आम तौर पर जिम्मेदारी तीन हिस्सों में बंटी होती है। लेकिन इस मेले में किसे क्या लिखित जिम्मेदारी मिली थी, यह अब तक सामने नहीं आया है। भीड़ संभालने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की गाइडलाइन ट्रैफिक और पार्किंग का प्लान बनाने की सलाह देती है। लेकिन यह सलाह है, बाध्यकारी कानून नहीं। इस मेले में क्या इंतजाम थे… चीनौर रोड के चेकिंग पॉइंट पर क्या हुआ, इस पर दो बातें हैं… सवाल 5: क्या जांच सिर्फ ट्रक ड्राइवर तक रहेगी, या पूरी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होगी? जवाब- अब तक कार्रवाई तीन रास्तों पर चल रही है। लेकिन व्यवस्था की जवाबदेही पर दो सवाल अभी बाकी हैं। कार्रवाई पर दो सवाल… इसी अंचल में रतनगढ़ की मिसाल… दतिया के रतनगढ़ मंदिर में 2006 की नवरात्रि में 56 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। इसके बाद वहां पुल बनाया गया। 2013 की नवरात्रि में उसी पुल पर भगदड़ मची और 115 लोगों की जान गई। तब 20 अधिकारी निलंबित हुए थे। सवाल यह है कि ग्वालियर में कार्रवाई कहां तक जाएगी। हादसे के बाद की व्यवस्था पर भी सवाल हैं… राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख, गंभीर घायलों को 2-2 लाख और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री राहत कोष से भी सहायता दी जा रही है। परिजन 25 लाख रुपए की मांग कर रहे हैं। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर का ये एपिसोड भी पढ़ें…
क्या ‘मोहन-मामा’ के बीच सब ठीक है?:कांग्रेस ने क्यों लगाया खींचतान का आरोप रविवार को सीहोर में आदिवासियों के 12 घर गिराए गए। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे जुल्म की पराकाष्ठा बताया और प्रभावित परिवारों के साथ धरना स्थल पर बैठ गए। उसी दिन रायसेन के भोजपुर में उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना अब कोई सरकार बंद नहीं कर पाएगी…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।
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ग्वालियर मंदिर हादसे में समिति को आतंकी हमले का शक: अब तक तीन तरह की थ्योरी सामने आईं, किसमें कितना दम; आखिर चूक हुई कहां? – Madhya Pradesh News
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