Tuesday, October 27, 2026
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देश में पहली बार शेयर बाजार में लिस्ट होंगे ‘टेंपल-बॉन्ड’: यूडीए 200 करोड़ के बॉन्ड जारी करेगा, उज्जैन के 11 मंदिरों के विकास पर खर्च होंगे 1124 करोड़ – Ujjain News




देश में पहली बार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए टेंपल बॉन्ड शेयर बाजार में लिस्ट किए जाएंगे। काल भैरव, भूखी माता सहित उज्जैन के 10 और नलखेड़ा के बगलामुखी माता मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए जारी होने वाले इन बॉन्ड को देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु और आम निवेशक खरीद सकेंगे। अगले एक-दो महीने में इनकी ऑनलाइन खरीद-बिक्री शुरू होने की संभावना है। बॉन्ड की लिस्टिंग से पहले शेयर बाजार में आयोजित होने वाले बेल सेरेमनी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शामिल होंगे और घंटी बजाएंगे। 643 करोड़ का लोन लेने की प्रक्रिया पूरी सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए शहर के 11 धार्मिक स्थलों के विकास के लिए 1124 करोड़ रुपए की योजना बनाई गई है। इसके लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) की गारंटी पर 643 करोड़ रुपए का लोन लेने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। संबंधित बैंक ने भी इसकी स्वीकृति दे दी है। मंदिरों के विकास के लिए 200 करोड़ रुपए के टेंपल बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। वहीं, केंद्र सरकार की अर्बन चैलेंज फंड योजना के तहत 281 करोड़ रुपए मिलने का प्रावधान है। ऐसे काम करेगा टेंपल बॉन्ड का मॉडल विकास प्राधिकरण मंदिरों के विकास के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक से 8.97% ब्याज दर पर लोन लेगा। इसके अलावा टेंपल बॉन्ड के जरिए बाजार से पूंजी जुटाई जाएगी। योजना के तहत श्रद्धालु, आम निवेशक और कॉर्पोरेट संस्थाएं अधिकृत बैंकिंग माध्यमों से बॉन्ड खरीद सकेंगी। इसके लिए नकद राशि लेकर मंदिर पहुंचने की जरूरत नहीं होगी। भुगतान डिजिटल और अन्य बैंकिंग माध्यमों से किया जा सकेगा। योजना के मुताबिक मंदिरों के विकास के बाद उनसे जुड़े इकोसिस्टम से होने वाली कमाई के जरिए बैंक का कर्ज चुकाने और बॉन्ड निवेशकों को भुगतान करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसमें मंदिरों के आसपास व्यावसायिक दुकानों, पार्किंग और प्रवेश शुल्क से मिलने वाला राजस्व शामिल होगा। श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं जुटाएंगे मंदिरों में पार्किंग, पेयजल, यात्री सुविधा केंद्र, सड़क और मार्ग विकास, लाइटिंग तथा सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े काम किए जाएंगे। सिंहस्थ-2028 में आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए दर्शन मार्ग, आवागमन और ठहरने की सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की योजना है। सांदीपनि लोक: 139 करोड़ रुपए से बदलेगा आश्रम का स्वरूप उज्जैन में श्रीमहाकाल महालोक के बाद भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम को भी भव्य स्वरूप देने की योजना है। करीब 5 हेक्टेयर क्षेत्र में सांदीपनि लोक विकसित किया जाएगा। इसके लिए 139 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई गई है। लक्ष्य सिंहस्थ-2028 से पहले इसका निर्माण पूरा करना है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी स्थान पर बलराम और सुदामा के साथ 16 विद्याओं और 64 कलाओं का ज्ञान अर्जित किया था। श्रीकृष्ण पाथेय योजना के तहत आश्रम का कायाकल्प किया जाएगा। योजना में भव्य प्रवेश द्वार, सुविधा केंद्र और श्रद्धालुओं के लिए अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की गाथा से परिचित कराने के लिए यहां डिजिटल अनुभव भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें एआर/वीआर तकनीक, डिजिटल और ऑडियो-विजुअल प्रदर्शनी तथा बहुभाषी डिजिटल कंटेंट शामिल होंगे। 108 फीट ऊंची प्रतिमा होगी आकर्षण सांदीपनि लोक में भगवान श्रीकृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। यह परिसर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी। प्रतिमा का डिजाइन आईआईटी/एनआईआईटी के तकनीकी परीक्षण और विंड टनल स्टडी के बाद तैयार किया जाएगा। कालभैरव महालोक: 163 करोड़ रुपए से होगा विकास सिंहस्थ-2028 में कालभैरव मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए मंदिर परिसर को महाकाल महालोक की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसके लिए 163 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की गई है। योजना में तीन बड़े पार्किंग स्थल, धर्मशाला, सुविधा केंद्र, नई अप्रोच रोड और श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके साथ होल्डिंग एरिया, मल्टीलेवल पार्किंग, पार्क, मूर्तियां और फाउंटेन भी विकसित किए जाएंगे। दर्शन मार्ग, पेयजल और आवागमन की व्यवस्था सुधारने पर भी जोर रहेगा। शनि लोक: 140 करोड़ रुपए से बनेगा मंदिर परिसर इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर परिसर में करीब 21,100 वर्गमीटर क्षेत्र में शनि लोक विकसित करने की योजना है। राज्य सरकार ने 7 जनवरी 2026 को इस परियोजना के लिए 140 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। परियोजना में भव्य मंदिर परिसर, घाटों का सौंदर्यीकरण, कतार प्रबंधन, स्मार्ट लाइटिंग, सीसीटीवी, लैंडस्केपिंग, पैदल पथ और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मंदिर परिसर में बेसाल्ट और बंसी पहाड़पुर के पत्थरों से मोनोलिथिक मंदिर संरचना तैयार करने की योजना है। इसमें नवग्रहों की महिमा दर्शाती नक्काशीदार कलाकृतियां, थ्रीडी पत्थर की जालियां, भव्य प्रवेश द्वार, धार्मिक मूर्तियां और सांस्कृतिक प्रांगण भी विकसित किए जाएंगे। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। विकास प्राधिकरण अध्यक्ष बोले- देश-विदेश के श्रद्धालु जुड़ सकेंगे विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी के मुताबिक केंद्र की योजना के तहत 25% राशि मिलने का प्रावधान है। इसके बाद स्टॉक एक्सचेंज में बेल सेरेमनी के जरिए बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। टेंपल बॉन्ड के माध्यम से देश और विदेश में रहने वाले श्रद्धालु भी मंदिरों के विकास में भागीदारी कर सकेंगे। इस प्रयोग के सफल होने पर दूसरे मंदिरों के विकास में भी इसी मॉडल को अपनाने की संभावना रहेगी।



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