प्रोजेक्ट कुशा: आत्मनिर्भर भारत की मिसाल
जहां S-500 विदेशी साझेदारी का उदाहरण है, वहीं ‘प्रोजेक्ट कुशा’ भारत की स्वदेशी ताकत का प्रतीक है. DRDO के नेतृत्व में चल रही इस परियोजना का लक्ष्य लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) सिस्टम बनाना है, जो पूरी तरह भारतीय तकनीक पर आधारित होगी.
पाकिस्तान के लिए डबल शॉक
S-400 के साथ S-500 और ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के जुड़ने से भारत का एयर डिफेंस नेटवर्क मल्टी-लेयर हो जाएगा. यानी दुश्मन की किसी भी हवाई चाल का जवाब भारत हर दूरी और ऊंचाई पर दे सकेगा. पाकिस्तान के पास कोई भी ऐसा हथियार नहीं है जो इस त्रिस्तरीय रक्षा कवच को भेद सके. चाहे उसके फाइटर जेट हों, बैलिस्टिक मिसाइलें या हाइपरसोनिक हथियार सभी भारतीय सीमा तक पहुंचने से पहले ही नष्ट हो जाएंगे.
चीन को भी मिलेगा संदेश
यह शक्ति प्रदर्शन सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा. चीन जो हाइपरसोनिक हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइलों पर भरोसा करता है, उसे भी यह साफ संदेश मिलेगा कि भारत के आसमान में सेंध लगाने की कीमत बहुत भारी होगी. S-500 और ‘कुशा’ के संयोजन से भारत एशिया की शीर्ष वायु शक्ति के रूप में स्थापित होगा.
इतनी मजबूत वायु सुरक्षा के साथ भारत केवल रक्षात्मक ही नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीतियां भी अपना सकेगा. जब आसमान पूरी तरह सुरक्षित होगा तो जमीनी और नौसैनिक मोर्चों पर भी भारत का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाएगा.
पाकिस्तान के लिए सपना बन जाएगी सेंध
जहां पहले पाकिस्तान समय-समय पर अपनी मिसाइल और ड्रोन तकनीक से भारत को परखता था… अब यह सिर्फ ख्वाब रहेगा. S-500 और ‘प्रोजेक्ट कुशा’ का कवच दुश्मन को उसके ही खेल में मात देगा. भारतीय सीमा के भीतर सेंध लगाने का हर प्रयास पहले से ही हवा में खत्म कर दिया जाएगा.

