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CISF and Guard of Honour: यह सीआईएसएफ में गार्ड ऑफ ऑनर को लेकर एक बार फिर सवाल उठना शुरू हो गए हैं. क्या है इन सवालों की सच्चाई और क्यों उठ रहे हैं यह सवाल, जानने के लिए पढ़ें आगे…
CISF and Guard of Honour: यह बात आज से करीब 15 महीने पहले 27 मई 2024 की है. उस समय केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की महानिदेशक नीना सिंह हुआ करती थीं. इसी दिन सीआईएसएफ मुख्यालय की तरफ से सभी महानिरीक्षकों (आईजी) को एक पत्र जारी किया गया था. इस पत्र में स्पष्ट तौर पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ को लेकर अनियिमतता की बात कही गई थी. ट्रेनिंग विभाग के असिस्टेंट कमांडेट मणिकुट्टी एस के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में कहा गया था कि सीआईएसएफ की एक इकाई के दौरे के दौरान, महानिदेशक ने पाया कि गार्ड ऑफ ऑनर को लेकर यूनिफार्मिटी नहीं है.

सीआईएसएफ महानिदेशालय की तरह से 27 मई 2024 को सभी महानिरीक्षकों को जारी किया गया पत्र. इसी पत्र में गार्ड ऑफ ऑनर में अनियमितता को लेकर चिंता जाहिर की गई थी.
सीआईएसएफ की तत्कालीन महानिदेशक नीना सिंह 31 जुलाई 2023 को सेवानिवृत्त हो गई और गार्ड ऑफ ऑनर को लेकर चर्चा एक बार फिर धीमी पड़ गई. इसके बाद, मई 2025 में एक दूसरा पत्र सामने आया. यह पत्र एक पीएसयू के प्रबंधन की तरफ से सीआईएसएफ यूनिट कमांडर को लिखा गया था. इस पत्र में सीआईएसएफ यूनिट कमांडर से अनुरोध किया गया था कि 28 अप्रैल 2025 को उनकी पीएसयू के सीएमडी चार्ज लेने जा रहे हैं. लिहाजा उनके सम्मान में सीआईएसएफ की तरफ से गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाए. इस पत्र के सामने आने के बाद चर्चा इस बात की शुरू हो गई कि क्या सीएमडी गार्ड ऑफ ऑनर के लिए अधिकृत हैं?

चेयरमैन की ज्वाइनिंग पर उनके सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर देने का अनुरोध इसी पत्र में किया गया था.
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट (BPR&D) की माने तो गार्ड ऑफ ऑनर के लिए सिर्फ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय गृहराज्य मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्यों के गृहमंत्री, पुलिस महानिदेशक, पुलिस अपर महानिदेशक, महानिरीक्षक और उपमहानिरीक्षक स्तर के अधिकारी ही अधिकृत हैं. इसके अलावा, भारत के दौरे पर आए हेड ऑफ फॉरेन स्टेट, वाइस हेड ऑफ फॉरेन स्टेट, हेड ऑफ डिप्लोमैटिक मिशन और हेड ऑफ फॉरेन पुलिस फोर्स को भी गार्ड ऑफ ऑनर देने की छूट दी है. ऐसे में सवाल यह भी उठने लगे कि यूनिट के सीएमडी को सलामी देना और गार्ड ऑफ ऑनर देना क्या पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लिए निर्धारित नियमावली का उल्लंघन नहीं है?

BPR&D की नियमावली के अनुसार गार्ड ऑफ ऑनर के लिए मान्य व्यक्ति की पात्रता.
यह बात यहीं खत्म नहीं हुई. स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर एक बार फिर अनधिकृत शख्सियत को गार्ड ऑफ ऑनर देने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया. इस चर्चा का आधार बना एनटीपीसी फरक्का के स्वतंत्रता दिवस समारोह 2025 का वीडियो. इस वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आए सीएमडी को रिसीव करते हैं. इसके बाद, ध्वजारोहण, फिर राष्ट्रगान होता है. सभी एक साथ राष्ट्र ध्वज को सलामी देते हैं. इसके बाद, शुरू होता है परेड निरीक्षक का दौड. परेड कमांडर मुख्य अतिथि को आकर परेड की रिपोर्ट देते हैं और कहते हैं- परेड निरीक्षण के लिए हाजिर हैं श्रीमान. इसके ठीक बाद, एक खुली जीप मंच के पास आकर लग जाती है. सीआईएसएफ के परेड कमांडर मुख्य अतिथि से परेड का निरीक्षण करने का आग्रह करते हैं.

15 अगस्त 2025 को एनटीपीसी फरक्का में आयोजित समारोह के दौरान परेड का निरीक्षण करते हुए मुख्य अतिथि. अर्धसैनिकबलों के जानकारों के अनुसार, परेड का निरीक्षण भी गार्ड ऑफ ऑनर के अंतर्गत ही आता है.
सीआईएसएफ से महानिरीक्षक के तौर पर सेवानिवृत्त हो चुके एक अधिकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम में ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रध्वज को सलामी देने तक बात ठीक है. लेकिन इसके बाद, परेड कमांडर की सलामी, परेड की रिपोर्ट देना, परेड निरीक्षण के लिए आमंत्रित करना, परेड निरीक्षण करना, गार्ड ऑफ ऑनर की प्रक्रिया के दायरे में ही आते हैं. परेड निरीक्षण ही एक तरह से गार्ड ऑफ ऑनर है. इस प्रक्रिया को सिर्फ सलामी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है.

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें
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